बकरी के बच्चे को क्या खिलाएं? जन्म से 3 महीने तक पूरा Feeding Chart
अगर आप बकरी पालन (Goat Farming) का काम करते हैं या हाल ही में आपने एक-दो बकरियां पाली हैं, तो यह बात आप भी अच्छे से जानते होंगे कि बकरी का बच्चा (मेमना) ही किसान की असली कमाई होता है। जब मेमना तंदुरुस्त रहता है, तो आगे चलकर वह मोटा-ताजा बनता है और बाज़ार में उसकी कीमत बहुत अच्छी मिलती है।
लेकिन अक्सर हमारे गांव-देहात के नए बकरी पालक भाई एक सबसे बड़ी गलती कर बैठते हैं। वे जन्म के तुरंत बाद या शुरुआत के 2-3 महीनों में बच्चे के खान-पान पर सही ध्यान नहीं दे पाते। उन्हें समझ ही नहीं आता कि किस हफ्ते में बच्चे को कितना दूध चाहिए और कब उसे घास या दाना देना शुरू करना है।
👉 ध्यान दें: गलत खान-पान या सही समय पर खीस (पेवस) न मिलने के कारण गांव में लगभग 30 से 40% मेमने जन्म के पहले महीने में ही दम तोड़ देते हैं या फिर वे दुबले-पतले रह जाते हैं।
अगर आप चाहते हैं कि आपका मेमना कभी बीमार न पड़े, उसका पेट न फूले, उसे दस्त (Loose Motions) न हों और उसका वजन बहुत तेज़ी से बढ़े, तो यह लेख आपके लिए ही है। आज हम आपको किसी किताबी भाषा में नहीं, बल्कि अपने सालों के अनुभव से एक बहुत आसान और देसी Feeding Chart बताएंगे, जिसे 8वीं-10वीं पढ़ा किसान भी आसानी से समझ सकता है।
Problem: बकरी के बच्चे शुरुआत में ही क्यों कमजोर या बीमार हो जाते हैं?
गांवों में अक्सर देखा जाता है कि बकरी का बच्चा पैदा होते ही सुस्त पड़ जाता है। दो-चार दिन तो ठीक चलता है, लेकिन उसके बाद वह दूध पीना छोड़ देता है, उसका पेट फूल जाता है या उसे सफेद-पीले रंग के दस्त शुरू हो जाते हैं।
इसके बाद किसान भाई परेशान होकर डॉक्टर के चक्कर लगाने लगते हैं और पानी की तरह पैसा बहाते हैं। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है या फिर बच्चा जिंदगी भर के लिए कमजोर (सुखंडी का शिकार) हो जाता है।
⚠️ Warning: मेमने की शुरुआती 90 दिनों की खुराक ही यह तय करती है कि वह भविष्य में 40-50 किलो का बकरा बनेगा या फिर बीमारी का घर रहेगा!
Main Reasons: मेमने के बीमार होने या मरने के 4 मुख्य कारण
जब तक हम बीमारी या कमजोरी की वजह नहीं समझेंगे, तब तक हम सही इलाज या खान-पान नहीं दे पाएंगे। किसान भाई अनजाने में ये 4 बड़ी गलतियां करते हैं:
- पहला पीला गाढ़ा दूध (खीस/खीसड़ी) न पिलाना: कई गांव में यह अंधविश्वास है कि थन का पहला गाढ़ा दूध बच्चे के लिए भारी होता है, इसलिए उसे फेंक देते हैं। यह सबसे घातक गलती है।
- जरूरत से ज्यादा या बहुत कम दूध पिलाना: अधिक दूध पिलाने से बच्चे को दस्त हो जाते हैं और कम पिलाने से बच्चा कुपोषण का शिकार हो जाता है।
- अचानक से हरा चारा या सूखा दाना देना: मेमने का पेट (रूंमेन) इंसानों के बच्चे की तरह बहुत नाजुक होता है। अगर आप 10-12 दिन के बच्चे के सामने ढेर सारी हरी घास रख देंगे, तो उसका पेट सड़ने लगेगा।
- साफ-सफाई की कमी: गंदे फर्श पर दूध पिलाने या मां के गंदे थन से दूध पीने पर कीटाणु सीधे बच्चे की आंतों में चले जाते हैं।
Step-by-Step Solution: जन्म से 3 महीने तक क्या और कैसे खिलाएं?
अब आइए बात करते हैं कि आखिर आपको दिन-प्रतिदिन और हफ्ते-दर-हफ्ते अपने मेमने को क्या खिलाना और पिलाना चाहिए। इसे हमने 4 आसान हिस्सों (Phases) में बांटा है।
Phase 1: जन्म के पहले दिन से 7 दिन तक (सबसे नाजुक समय)
मेमने के पैदा होते ही सबसे पहला काम यह करें कि उसका मुंह और नाक साफ सूती कपड़े से पोछें।
- खीस (Colostrum) पिलाना: जन्म के आधे घंटे के भीतर (हर हाल में 2 घंटे के अंदर) बच्चे को मां का पहला गाढ़ा पीला दूध यानी ‘खीस’ जरूर पिलाएं।
- यह क्यों जरूरी है? खीस में कुदरती ताकत (रोग प्रतिरोधक क्षमता) होती है। यह बच्चे की आंतों की सफाई करती है और उसे बीमारियों से लड़ने का कवच देती है।
💡 Pro Tip: पहले हफ्ते में बच्चे को दिन में कम से कम 4 से 5 बार थोड़ा-थोड़ा करके मां का दूध पिलाएं। एक बार में पूरा पेट न भरें।
Phase 2: 8वें दिन से 30वें दिन तक (दूध + Creep Feed की शुरुआत)
इस दौर में बच्चा थोड़ा चंचल हो जाता है और कूदने-फांदने लगता है। अब केवल दूध से उसका काम नहीं चलेगा।
- दूध की मात्रा: बच्चे को उसके कुल वजन का 10% दूध पूरे दिन में पिलाना चाहिए। अगर बच्चे का वजन 3 किलो है, तो उसे दिनभर में लगभग 300ml दूध (3-4 बार में बांटकर) दें।
- क्रीप फीड (Creep Feed) शुरू करें: 15वें दिन से बच्चे के आगे थोड़ा सा पिसा हुआ दाना (जैसे मक्का का दलिया, चोकर और थोड़ा सा चना) एक छोटी टोकनी में रखें। बच्चा इसे चाटना शुरू करेगा।
- साफ पानी: 15-20 दिन बाद बच्चे के पास हमेशा साफ और ताजा पानी एक बर्तन में जरूर रखें।
Phase 3: 1 महीना से 2 महीना (घास और दाने की आदत)
अब आपके मेमने की आंतें और पेट (Rumen) मजबूत होने लगे हैं। इस समय बच्चे की सही ग्रोथ शुरू होती है।
- दूध धीरे-धीरे कम करें: अब दिन में केवल 2 बार (सुबह और शाम) दूध पिलाएं।
- कोमल हरा चारा: अब आप बच्चे को मुलायम और कोमल हरी घास, बरसीम या पीपल/सिरीस की एकदम नरम पत्तियां दे सकते हैं। कड़क या मोटी डंठल वाला चारा बिल्कुल न दें।
- दाना मिश्रण (Concentrate Feed): रोजाना लगभग 50 से 100 ग्राम दाना मिश्रण देना शुरू करें।
Phase 4: 2 महीना से 3 महीना (दूध छुड़ाना / Weaning Period)
3 महीने पूरे होते-होते मेमने का दूध पूरी तरह छुड़ा दिया जाता है। इसे वैज्ञानिक भाषा में Weaning कहते हैं।
- दूध की स्थिति: दिन में केवल एक बार दूध दें और 90वें दिन तक आते-आते दूध पूरी तरह बंद कर दें।
- हरा और सूखा चारा: मेमना अब आराम से हरा चारा, भूसा और दाना खाने लगेगा।
- दाना की मात्रा: रोजाना 150 से 200 ग्राम तक दाना मिश्रण बढ़ा दें।
Best Diet Plan: जन्म से 90 दिन का आसान Feeding Chart Table
किसान भाइयों की आसानी के लिए नीचे एक बहुत ही सरल चार्ट दिया गया है, जिसे आप अपने मोबाइल में सेव करके रख सकते हैं:
| समय / उम्र (Age) | क्या खिलाएं/पिलाएं? (Feed Items) | कितनी बार दें? (Frequency) | मुख्य फायदा (Benefit) |
|---|---|---|---|
| जन्म के 0 से 3 दिन | केवल मां का पहला गाढ़ा दूध (खीस/Colostrum) | दिन में 4–5 बार | बीमारियों से सुरक्षा और पेट की सफाई |
| 4 दिन से 14 दिन | केवल मां का शुद्ध दूध | दिन में 3–4 बार | शरीर का ढांचा मजबूत होना |
| 15 दिन से 30 दिन | दूध + हल्का क्रीप फीड (दाना चुटकी भर) | दिन में 3 बार दूध + थोड़ा दाना | पेट के अंदरूनी हिस्से का विकास |
| 1 महीना से 2 महीना | दूध (कम) + नरम हरी पत्तियां + 50g दाना | दिन में 2 बार दूध + चारा | वजन में तेजी से बढ़ोतरी |
| 2 महीना से 3 महीना | दूध बंद करने की तैयारी + 150g दाना + चारा | दिन में 1 बार दूध फिर बंद | मेमना आत्मनिर्भर बनता है |
Low Investment Strategy: कम खर्चे में घर पर बनाएं ‘क्रीप फीड’ (Creep Feed)
बाजार से महंगी गोलियां (Feed Pellets) खरीदने की कोई जरूरत नहीं है। आप अपने घर में मौजूद अनाज से ही सबसे बढ़िया क्रीप फीड बना सकते हैं:
- मक्का का दलिया: 40% (ऊर्जा के लिए)
- चने का छिलका या चुनी / खली: 30% (प्रोटीन के लिए)
- गेहूं का चोकर: 27% (पाचन के लिए)
- मीठा नमक और मिनरल मिक्चर: 3% (हड्डियों की मजबूती के लिए)
इन सब को आपस में मिलाकर छोटे बच्चे के सामने रख दें। इसे खाने से मेमने का वजन हर महीने 3 से 4 किलो तक आसानी से बढ़ता है।
👉 फायदा क्यों होगा? बाजार के महंगे चारे के बिना, घर के सस्ते अनाज से मेमने को वो सारे विटामिन और प्रोटीन मिल जाएंगे जो उसके तेजी से बढ़ने के लिए जरूरी हैं।
Desi Tips: गांव के पुराने और असरदार घरेलू नुस्खे
- अजवाइन और गुड़ का पानी: अगर बच्चे का पेट थोड़ा भारी लगे या गैस बने, तो चुटकी भर अजवाइन को थोड़े से गुड़ के साथ पानी में उबालकर ठंडा करके 5-10 ml पिला दें।
- हल्दी और सरसों का तेल: नवजात बच्चे की नाभि (Navel) कटने के बाद उस पर बीटाडिन या फिर हल्दी में थोड़ा सरसों का तेल मिलाकर लगाएं, इससे इंफेक्शन नहीं होगा।
- पेवड़ी/खीस ज्यादा पी ले तो: अगर बच्चा गलती से ज्यादा दूध पी ले और उसे दस्त लग जाएं, तो उसे मां से अलग करें और थोड़ा सा छाछ (मठा) चुटकी भर भुने जीरे के साथ दें।
Real-Life Story: रामदीन किसान की समझदारी की कहानी
बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले किसान रामदीन पहले हर साल 3-4 मेमने खो देते थे। उनके बच्चे या तो पैदा होने के 10 दिन बाद दस्त से मर जाते थे या फिर 6 महीने के होकर भी पतले बने रहते थे।
जब उन्होंने जाना कि वे बच्चे को पहला गाढ़ा दूध नहीं पिलाते थे और 10वें दिन ही कड़क हरा चारा खाने देते थे, तो उन्होंने अपनी गलती सुधारी।
रामदीन ने इस बार नए मेमने को 15वें दिन से घर का बना क्रीप फीड दिया और सही समय पर दूध की मात्रा तय की। नतीजा यह हुआ कि जो मेमना पहले 6 महीने में 8 किलो का होता था, इस बार उनका 3 महीने का मेमना ही 12 किलो का तंदुरुस्त बकरा बन गया!
Mistakes to Avoid: ये 5 गलतियां कभी न करें
- ❌ गंदा दूध या ठंडा दूध पिलाना: जब मां का दूध कम हो और आप ऊपर का गाय/भैंस का दूध दें, तो ध्यान रखें कि दूध हल्का गुनगुना होना चाहिए।
- ❌ पेट के कीड़ों की दवा (Deworming) न देना: 30वें दिन बच्चे को डॉक्टर की सलाह से पेट के कीड़ों की दवा (Dewormer Syrups) जरूर दें।
- ❌ गीली जगह पर रखना: मेमने को हमेशा सूखी, साफ और हवादार जगह पर रखें। नमी से बच्चे को निमोनिया हो जाता है।
- ❌ अचानक दूध बंद कर देना: 3 महीने पर अचानक दूध बंद न करें, धीरे-धीरे 10-15 दिनों के अंदर मात्रा कम करते हुए बंद करें।
- ❌ मां को बीमार हालत में दूध पिलाने देना: अगर मां के थन में थनैला (Mastitis) की बीमारी है, तो वह दूध बच्चे को बिल्कुल न पीने दें।
Pro Tips: तेजी से वजन बढ़ाने के सीक्रेट्स
💡 टिप 1: 21वें दिन और 45वें दिन बच्चे को विटामिन B-Complex का सिरप (जैसे Conplex या Belamal) 2-3 ml रोज 5 दिन तक दें। इससे बच्चे की भूख खुलती है।
💡 टिप 2: मेमने को सुबह-सुबह की ताजी धूप (15-20 मिनट) जरूर लगने दें। इससे शरीर में कुदरती विटामिन D बनता है और हड्डियां लोहे जैसी मजबूत होती हैं।
Conclusion (निष्कर्ष)
बकरी पालन में सफलता का सीधा रास्ता मेमनों की सही देखभाल से होकर जाता है। अगर आपने शुरुआत के 90 दिन यानी 3 महीने अपने बकरी के बच्चे को सही खुराक, साफ पानी और बीमारियों से बचाकर रख लिया, तो मान लीजिए कि आपकी आधी जंग जीत ली गई।
इस Feeding Chart को अपनाएं, छोटे-छोटे देसी उपायों पर ध्यान दें और फालतू दवाइयों के खर्च से बचें। आपका मेमना तंदुरुस्त रहेगा तो आपका मुनाफा भी दोगुना होगा।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1: बकरी के बच्चे को जन्म के कितने समय बाद दूध पिलाना चाहिए?
उत्तर: जन्म के 30 मिनट के अंदर और हर हाल में 2 घंटे के भीतर पहला गाढ़ा दूध (खीस) पिला देना चाहिए।
Q2: क्या मेमने को गाय का दूध पिला सकते हैं?
उत्तर: हां, अगर बकरी दूध नहीं दे रही है या मर गई है, तो आप गाय का हल्का गुनगुना दूध (थोड़ा पानी मिलाकर) पिला सकते हैं।
Q3: मेमना हरा चारा खाना कब शुरू करता है?
उत्तर: मेमना 20 से 25 दिन की उम्र में थोड़ा-थोड़ा कोमल और नरम हरा चारा चबाना शुरू कर देता है।
Q4: मेमने को पेट के कीड़ों की दवा कब देनी चाहिए?
उत्तर: पहली बार 30 दिन (1 महीने) का होने पर पेट के कीड़ों की दवा (Deworming Syrup) देनी चाहिए।
Q5: बकरी के बच्चे को दस्त हो जाएं तो क्या करें?
उत्तर: दूध पिलाना थोड़ा कम करें, बच्चे को ORS का घोल या उबला हुआ ठंडा पानी पिलाएं और तुरंत पशु डॉक्टर से सलाह लें।
Q6: मेमने का दूध पूरी तरह कब बंद कर देना चाहिए?
उत्तर: जब मेमना 3 महीने (90 दिन) का हो जाए और अच्छे से दाना-घास खाने लगे, तब दूध पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।
Q7: क्रीप फीड (Creep Feed) क्या होता है?
उत्तर: यह छोटे बच्चों के लिए बनाया गया हल्का, पौष्टिक और आसानी से पचने वाला दाना मिश्रण होता है जो 15 दिन की उम्र से दिया जाता है।
Q8: क्या 1 महीने के बच्चे को पानी देना जरूरी है?
उत्तर: जी हां, 15-20 दिन के बाद बच्चे के पास हमेशा साफ और ताजा पानी मौजूद होना चाहिए।
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